वर्तमान समय में भगत सिंह के वैचारिक दर्शन का एक अध्ययन

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देवेंद्र सिंह, शगुप्ता परवीन

Abstract

वर्तमान परिस्थितियों में भगत सिंह के विचार (जैसे साम्राज्यवाद-विरोधी, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, वर्ग-चेतना और युवाओं की सक्रिय भागीदारी) आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं, खासकर सांप्रदायिकता, आर्थिक असमानता और राजनीतिक भ्रष्टाचार जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए, उनके दर्शन एक इंकलाब (क्रांति) के लिए वैज्ञानिक सोच, धर्म से राजनीति को अलग करने और शोषण-मुक्त समाज के निर्माण का मार्ग दिखाते हैं। आज भी देश में धार्मिक और सांप्रदायिक तनाव आम हैं, और राजनीति द्वारा इन्हें इस्तेमाल होता है। भगत सिंह का समाधान उन्हें धर्म को व्यक्तिगत मामला बताते हुए वर्ग-चेतना को सशक्तिकरण का हल मानना था, जहाँ इंसान को इंसान के रूप में देखा जाए, न कि किसी धर्म के अनुयायी के रूप में। बढ़ती आर्थिक असमानता और पूंजीवाद का प्रभुत्व है। भगत सिंह का समाधान शोषण के संरचनात्मक अंत और उत्पादन के साधनों का सामूहिक स्वामित्व स्थापित करना था, जहाँ शोषण समाप्त हो और संसाधनों का समान वितरण हो। धर्म का राजनीतिकरण होता है और यह समाज को बांटता है। भगत सिंह का समाधान उनका मानना था कि धर्म व्यक्तिगत मामला है और इसे राजनीति से दूर रखना चाहिए। उनका नास्तिकवाद (atheism) अंधविश्वासों पर सवाल उठाने और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की ओर इंगित करता है।

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