“हिंदी कहानी साहित्य में स्त्री विमर्श: संघर्ष, प्रतिरोध और सामाजिक परिवर्तन”

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भारत भूषण, कुसम लता

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हिंदी कहानी साहित्य में स्त्री जीवन के विविध अनुभवों, संघर्षों और सामाजिक स्थितियों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया है। लंबे समय तक भारतीय समाज में स्त्री की भूमिका मुख्यतः परिवार, विवाह और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित मानी जाती रही, लेकिन आधुनिक हिंदी कहानी ने स्त्री के जीवन को एक स्वतंत्र सामाजिक और मानवीय प्रश्न के रूप में प्रस्तुत किया। स्त्री विमर्श के माध्यम से हिंदी कहानीकारों ने पितृसत्तात्मक व्यवस्था, लैंगिक असमानता, घरेलू हिंसा, आर्थिक निर्भरता, सामाजिक रूढ़ियों, विवाह संस्था और स्त्री की अस्मिता से जुड़े प्रश्नों को सामने रखा है। इस शोध-पत्र का उद्देश्य हिंदी कहानियों में चित्रित स्त्री संघर्ष, उसके प्रतिरोध, आत्मसम्मान और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया का अध्ययन करना है। चयनित कहानियों के विश्लेषण के माध्यम से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि हिंदी कहानी में स्त्री केवल पीड़ित या शोषित पात्र नहीं है, बल्कि वह अपने अधिकारों, स्वतंत्रता और पहचान के लिए संघर्ष करने वाली सक्रिय चेतना के रूप में भी सामने आती है। यह अध्ययन यह भी दर्शाता है कि स्त्री विमर्श ने हिंदी कहानी को सामाजिक यथार्थ से जोड़ने के साथ-साथ समाज में लैंगिक समानता और मानवीय गरिमा के प्रति नई दृष्टि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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