आदिवासी आजीविका,रोजगार और कौशल विकास
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Abstract
प्रस्तुत शोध आलेख “आदिवासी आजीविका, रोजगार और कौशल विकास” का उद्देश्य आदिवासी समुदायों की वर्तमान आजीविका संरचना, युवाओं के कौशल, प्रशिक्षण एवं रोजगार के मध्य संबंध तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित सतत एवं सम्मानजनक रोजगार की संभावनाओं का विश्लेषण करना है। अध्ययन का क्षेत्र जबलपुर एवं आसपास के आदिवासी क्षेत्र हैं, जहाँ कृषि, लघु वनोपज, पशुपालन, हस्तशिल्प, पारंपरिक कौशल तथा असंगठित श्रम आजीविका के प्रमुख आधार हैं। बदलती आर्थिक परिस्थितियों में शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, डिजिटल तकनीक, उद्यमिता और बाजार संपर्क आदिवासी युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर उत्पन्न कर सकते हैं।
अध्ययन में यह परीक्षण किया गया है कि कौशल प्रशिक्षण किस सीमा तक वास्तविक रोजगार, स्वरोजगार और आय-सृजन से जुड़ रहा है तथा प्रशिक्षण की बाजार-संगति में कौन-सी प्रमुख बाधाएँ विद्यमान हैं। साथ ही पारंपरिक ज्ञान एवं कौशल की आर्थिक संभावनाओं, महिलाओं की आर्थिक सहभागिता, स्थानीय संसाधनों पर आधारित सूक्ष्म उद्यमों तथा डिजिटल एवं वित्तीय समावेशन का विश्लेषण किया गया है। सरकारी योजनाओं और वास्तविक लाभार्थी अनुभवों के मध्य अंतर को भी अध्ययन का महत्वपूर्ण पक्ष माना गया है।
अध्ययन के आधार पर “स्थानीय संसाधन–स्थानीय कौशल–स्थानीय रोजगार” पर आधारित समग्र विकास मॉडल प्रस्तावित किया गया है। इसमें कौशल विकास को मूल्य संवर्धन, वित्तीय सहायता, बाजार संपर्क, डिजिटल सशक्तीकरण, संस्थागत सहयोग और उद्यमिता से जोड़ने पर बल दिया गया है। निष्कर्षतः समुदाय की सहभागिता, महिला एवं युवा सशक्तीकरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर आधारित समन्वित मॉडल आदिवासी क्षेत्रों में आत्मनिर्भर, रोजगारपरक और सतत स्थानीय विकास को प्रभावी दिशा प्रदान कर सकता है।