आधुनिक परिवेश में महिलाओं की बदलती आर्थिक स्थिति: अवसर, बाधाएं और सामाजिक स्वीकार्यता
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Abstract
आधुनिक परिवेश में महिलाओं की आर्थिक स्थिति में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। वैश्वीकरण, शहरीकरण, शिक्षा का प्रसार, तकनीकी विकास और सरकारी योजनाओं ने महिलाओं के आर्थिक क्षेत्र में प्रवेश को सरल बनाया है। आज महिलाएँ उद्यमिता, सेवाक्षेत्र, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, स्व–रोज़गार तथा कॉर्पोरेट जगत-सभी क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। इसके बावजूद, सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ, लैंगिक भेदभाव, घरेलू दायित्व, पूँजी की कमी, निर्णयकारी पदों तक सीमित पहुँच जैसे कारक महिलाओं की पूर्ण आर्थिक प्रगति को प्रभावित करते हैं। भारत में महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर अभी भी विश्व औसत से कम है, जो दर्शाती है कि अवसर उपलब्ध होने के बावजूद सामाजिक स्वीकार्यता और संरचनात्मक सहयोग पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ई–कॉमर्स, कौशल विकास योजनाएँ, स्वयं सहायता समूह एवं महिला-उन्मुख सरकारी नीतियाँ महिलाओं के लिए नए अवसर उत्पन्न कर रही हैं। सामाजिक दृष्टिकोणों में धीरे-धीरे आने वाला परिवर्तन भी महिलाओं की आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। यह अध्ययन आधुनिक समाज में महिलाओं की आर्थिक स्थिति में आए परिवर्तनों का विश्लेषण करता है तथा अवसरों और बाधाओं दोनों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से मूल्यांकन करता है। साथ ही यह अध्ययन समाजिक स्वीकार्यता और नीतिगत सहयोग के संबंध पर भी प्रकाश डालता है।